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मेनोपॉज

रजोनिवृत्ति

- यह अंत नहीं है

रजोनिवृत्ति
क्या है?

  • यह हर महिला के जीवन का एक सामान्य शारीरिक भाग (हिस्सा) है।
  • यह एक महिला के मासिक धर्म के दौर के अंत का प्रतीक है।
  • चिकित्सकीय रूप से, यह कहा जाता है कि जब आखिरी मासिक धर्म के 12 महीने बीत जाते हैं तो रजोनिवृत्ति आ जाती है।
  • रजोनिवृत्ति का सामान्य काल (समय) 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच होता है।
  • रजोनिवृत्ति होने पर महिला का प्रजनन का दौर (चक्र) समाप्त हो जाता है।
  • अब वह गर्भवती नहीं हो सकती.
  • आपके रजोनिवृत्ति का समय आपके जीन पर निर्भर करता है। आप लगभग उसी समय रजोनिवृत्ति से गुजरेंगी जब आपकी माँ या बड़ी बहन को रजोनिवृत्ति हुई थी।
  • रजोनिवृत्ति के लक्षण लगभग 5 वर्षों तक बने रहते हैं।
  • रजोनिवृत्ति के बाद योनि से कोई भी रक्तस्राव का होना असामान्य है।
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रजोनिवृत्ति की अवस्थाएं

रजोनिवृत्ति की अवस्थाएं

  • समय से पहले रजोनिवृत्ति: लगभग 1% महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले, यानि समय से पहले रजोनिवृत्ति होती है।
  • समय से पहले रजोनिवृत्ति: लगभग 5% महिलाओं को अपने जीवन में समय से पहले, लगभग 40-45 वर्ष की आयु में, रजोनिवृत्ति से गुजरना पड़ता है।
  • पेरीमेनोपॉज़: यह वास्तविक रजोनिवृत्ति से 5-10 वर्ष पहले की अवधि है। आपके मासिक धर्म की अवधि और रक्तस्राव की अवधि बदलने लगती है। हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं। आपको विशेष रूप से मासिक धर्म के दौरान घुटनों, पीठ और पैरों में दर्द का अनुभव होता है।
  • रजोनिवृत्ति: आखिरी मासिक धर्म के एक वर्ष बाद
  • रजोनिवृत्ति के बाद: आखिरी मासिक धर्म से एक वर्ष के बाद पूरे जीवन भर

समय से पहले रजोनिवृत्ति का क्या कारण हो सकता है?

  • महिलाएं अपने अंडे तेजी से खो रही हैं और इसलिए, तनाव, खराब आहार, भोजन में कीटनाशकों, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों आदि के कारण जल्दी रजोनिवृत्ति हो रही है।
  • कोई भी गर्भाशय की सर्जरी जैसे सिस्ट हटाना या अंडाशय को हटाना
  • कीमोथेरेपी
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रजोनिवृत्ति के प्रभाव

रजोनिवृत्ति के प्रभाव

  • हॉट फ्लैशेस – चेहरे, गर्दन और छाती में अचानक और तीव्र गर्मी का अहसास होना। अक्सर लालिमा, धड़कनों का तेज़ होना और पसीना आने के साथ होता है। हॉट फ्लैश कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक रह सकते हैं।
  • नाइट स्वेट्स – यह मुख्य रूप से रात में होते हैं और बार-बार नींद से जागने का कारण बनते हैं।
  • त्वचा से जुड़ी समस्याएं – त्वचा पतली, सूखी और कम लोचदार हो जाती है। झुर्रियाँ और महीन रेखाएं दिखने लगती हैं। महिलाएं वयस्क अवस्था में मुंहासों से परेशान हो सकती हैं। होंठ, ठोड़ी और चेहरे पर मोटे बाल उग आते हैं। त्वचा का रंग बदलता है (पिग्मेंटेशन)।
  • योनि से जुड़ी समस्याएं – योनि की झिल्ली पतली और कमजोर हो जाती है। योनि सूखी, खुजलीदार और संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है।
  • बालों से जुड़ी समस्याएं – बालों की मात्रा घट जाती है। उनकी चमक खत्म हो जाती है और वे रूखे और मोटे हो जाते हैं।
  • बार-बार मूत्र मार्ग में संक्रमण होना।
  • हड्डियों का तेजी से क्षय – रजोनिवृत्ति के बाद हर साल महिला 2 से 3% हड्डियों की घनता खो देती है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  • भावनात्मक अस्थिरता, चिड़चिड़ापन, चिंता और अवसाद।
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रजोनिवृत्ति के सकारात्मक प्रभाव

रजोनिवृत्ति के सकारात्मक प्रभाव

  • मासिक धर्म का अंत हो जाता है। अब रक्तस्राव या स्पॉटिंग का कोई खतरा नहीं रहता।
  • सेनेटरी नैपकिन, टैम्पॉन, पीरियड पैंटीज़ जैसी चीज़ें खरीदने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।
  • अब आप गर्भवती नहीं हो सकतीं। इसलिए गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग भी बंद किया जा सकता है।
  • अनचाही गर्भावस्था का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
  • कुछ महिलाओं में देखा गया है कि अंडरआर्म, पैर और प्यूबिक हेयर कम हो जाते हैं या पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
  • कई महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद जीवन के प्रति एक नया उत्साह देखने को मिलता है। इसे "पोस्ट मेनोपॉज़ल ज़ेस्ट" कहा जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, 50 की उम्र के बाद महिलाओं में आशावादिता बढ़ जाती है।
  • इस दौर में महिलाएं अक्सर खुद से प्यार करने और अपनी देखभाल करने के लिए समय निकाल पाती हैं क्योंकि तब तक उनकी ज़िंदगी की बड़ी ज़िम्मेदारियाँ पूरी हो चुकी होती हैं।

जीवनशैली में सहायक बदलाव

  • आराम और नींद: सुनिश्चित करें कि आपको 7-8 घंटे की बिना किसी बाधा की नींद मिले। रात 9 बजे से 11 बजे के बीच सोने से अच्छी नींद आती है। दिन में 20-30 मिनट की झपकी लें।
  • अपने आहार में शामिल करें: फल और सब्ज़ियाँ, कच्चा केला, ब्रोकली, ब्रोकली स्प्राउट्स, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, जड़ वाली सब्ज़ियाँ जैसे शकरकंद, बैंगनी रतालू, सूखे फल, मेवे और बीज - कद्दू, सूरजमुखी, तिल, हेम्प (भाँग), चिया; बाजरा, ज्वार, रागी, राजगिरा, बीन्स, काले चने, दालें, स्टील कट ओट्स, कुट्टू, किनोवा, उबले हुए भूरे चावल, दही या छाछ, नारियल पानी, नारियल का दूध, नींबू, कोकम, आंवला, खजूर, अदरक की चाय।
  • खाने से बचें: पैक किये हुए या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और जूस, तला हुआ और मसालेदार भोजन, पास्ता, पिज़्ज़ा, फास्ट फूड, चाय/कॉफी, चीनी।
  • सुनिश्चित करें कि आप प्रतिदिन व्यायाम करें। हफ्ते में 3 दिन 30 मिनट की पैदल सैर, 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और 2 दिन योगा करें।
  • प्रतिदिन अपने आहार में एक मल्टी-विटामिन मिनरल सप्लीमेंट शामिल करें।
  • सुनिश्चित करें कि आपका कैल्शियम का सेवन बना रहे।
  • एस्ट्रोजेन की सदृश्यता के लिए (अनुकरण करने) और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए अपने आहार में आइसोलेटेड सोया प्रोटीन शामिल करें।
  • अपने ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियन्त्रित रखें।
  • सॉफ्ट इंटिमेट वॉश का उपयोग करके अच्छी प्रकार से योनि की स्वच्छता सुनिश्चित करें।
  • सूखापन और खुजली से बचने के लिए अपनी योनि के बाहरी हिस्से पर नारियल का तेल या घी लगाएं।

रजोनिवृत्ति के दौरान सहायक न्यूट्रीएंट्स

कैल्शियम

हड्डियों को मज़बूत रखने, हड्डी के फ्रैक्चर को रोकने, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए आवश्यक है

शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करने के लिए

हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और हड्डियों के क्षय से बचाव के लिए। नींद और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करने में मदद करता है

आइसोफ्लेवोन्स से भरपूर। ये शरीर में एस्ट्रोजेन जैसे यौगिक की तरह काम करते हैं। ये प्राकृतिक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के रूप में कार्य करते हैं। यह मांसपेशियों के भार को बनाए रखने में भी मदद करता है

ये दिल के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं

मस्तिष्क और हड्डियों के स्वास्थ्य तथा लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक

हमारे शरीर में "खुशी का हार्मोन" सेरोटोनिन बनाने में मदद करता है

विटामिन E

यह एक एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर में विषाक्त पदार्थों को अवरुद्ध करता (रोकता) है

हमारे शरीर के विशिष्ट माइक्रोबायोम को संतुलित करने में मदद करता है

ब्रेन फॉग से लड़ने और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है

मांसपेशियों में ऊर्जा उत्पन्न करने में मदद करता है

मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में मोतियाबिंद का जोखिम बढ़ जाता है। इन मैक्युलर कैरोटेनॉइड्स पर शोध हुआ है कि ये मोतियाबिंद और उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं

यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है, खासकर उस समय जब हार्मोनल बदलाव शरीर के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं

अध्ययनों में पाया गया है कि यह रजोनिवृत्ति से जुड़े शारीरिक और शारीरिक (फिजियोलॉजिकल) लक्षणों में सुधार करता है, जिनमें योनि में सूखापन और हॉट फ्लैशेस शामिल हैं

सप्लीमेंट्स जो रजोनिवृत्ति के दौरान
मदद कर सकते हैं

इनुलिन, बैसिलस कोएगुलन्स, बिफिडोबैक्टीरियम लैक्टिस और एंजाइम टैबलेट के साथ वनस्पति अर्क

प्रोबायोटिक्स

  • जिन महिलाओं को मासिक धर्म नहीं होता है, उन्हें दिन के सबसे भारी भोजन से आधे घंटे पहले हर रोज़ एक कैप्सूल का सेवन करना चाहिए